RPF अफसर चंदना सिन्हा: 1500 बच्चों की जान बचाकर रेलवे का सर्वोच्च सम्मान जीतने वाली जाबाज महिला
रेलवे प्लेटफॉर्म्स पर हर रोज कई बच्चे भटक जाते हैं, कुछ अपने परिवार से दूर हो जाते हैं तो कुछ मानव तस्करों के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे ही मासूमों के लिए उत्तर प्रदेश रेलवे नेटवर्क पर तैनात RPF इंस्पेक्टर चंदना सिन्हा उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं।
बीते दो वर्षों में चंदना और उनकी टीम ने 1,500 से ज्यादा बच्चों को सुरक्षित बचाया। अकेले 2024 में 494 बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 41 बच्चे तस्करी के शिकार थे और 152 बच्चों को चंदना ने खुद सुरक्षित निकाला।
बच्चों की सुरक्षा में उनके अद्भुत योगदान को देखते हुए भारतीय रेलवे ने उन्हें ‘अति विशिष्ट रेल सेवा पुरस्कार’ से सम्मानित किया। दिल्ली में आयोजित समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया गया, लेकिन सम्मान मिलने के तुरंत बाद चंदना लखनऊ लौट आईं, क्योंकि प्लेटफॉर्म पर अकेले बैठे एक बच्चे की सूचना मिली थी।
चंदना की टीम हमेशा प्लेटफॉर्म पर सतर्क रहती है। जैसे ही कोई बच्चा अकेला दिखाई देता है, उसे तुरंत सुरक्षा में लिया जाता है। पूछताछ कर बच्चे की पहचान की जाती है और परिवार तक पहुँचाने की कोशिश की जाती है। अगर परिजन नहीं मिलते तो बच्चों को सुरक्षित एनजीओ को सौंपा जाता है।
‘ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते’ के तहत जून 2024 से चंदना ने तस्करी रूट्स पर नजर रखी। साल 2025 में उनकी टीम ने 1,032 बच्चों को बचाया, जिनमें मजदूरी के लिए ले जाए जा रहे 39 बच्चे और एक 6 साल की बच्ची भी शामिल थी।
चंदना सिन्हा ने यह साबित कर दिया कि खाकी वर्दी में भी एक मां का संवेदनशील दिल धड़कता है, और उनकी बहादुरी ने देशभर में लोगों का दिल जीत लिया है। उनके जज्बे और समर्पण को देखकर हर कोई उन्हें सलाम कर रहा है।