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5 रुपये के पान मसाला में केसर का दावा पड़ा भारी, सलमान खान को कोर्ट में होना होगा पेश
Shiva Azad / 27-12-2025

5 रुपये के पान मसाला में केसर का दावा पड़ा भारी, सलमान खान को कोर्ट में होना होगा पेश

नेशनल डेस्क: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं। इस बार मामला किसी फिल्म या निजी विवाद का नहीं, बल्कि उनके द्वारा प्रचारित पान मसाला ब्रांड के विज्ञापन से जुड़ा है। राजस्थान के कोटा स्थित उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (कंज्यूमर कोर्ट) ने पान मसाले में “केसर युक्त” होने के दावे को भ्रामक मानते हुए सख्त रुख अपनाया है और अभिनेता सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं।


यह मामला कोटा के अधिवक्ता इंद्र मोहन सिंह हनी द्वारा दायर शिकायत से सामने आया है। शिकायत में कहा गया है कि राजश्री पान मसाला के विज्ञापनों में दावा किया जाता है कि उत्पाद केसर युक्त है, जबकि बाजार में शुद्ध केसर की कीमत करीब 4 लाख रुपये प्रति किलो तक होती है। ऐसे में मात्र 5 रुपये के पाउच में असली केसर होने का दावा उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला है।


शिकायतकर्ता का आरोप है कि सलमान खान जैसे बड़े और लोकप्रिय अभिनेता जब किसी उत्पाद का प्रचार करते हैं, तो आम लोग उस पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। इसी भरोसे का फायदा उठाकर पान मसाले जैसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पाद को आकर्षक और प्रीमियम बताकर युवाओं को उसकी ओर लुभाया जा रहा है। इसे उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया गया है।


मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया जब अदालत में पेश किए गए सलमान खान की ओर से दाखिल जवाब और पावर ऑफ अटॉर्नी पर किए गए हस्ताक्षरों पर सवाल उठाए गए। 9 दिसंबर की सुनवाई में शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इन दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षर, सलमान खान के पहले जोधपुर जेल और अदालत में किए गए हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते। इससे फर्जी दस्तावेज पेश किए जाने की आशंका जताई गई।


कोटा कंज्यूमर कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा जिन अधिवक्ता आर.सी. चौबे ने इन दस्तावेजों को नोटराइज किया था, उन्हें भी कोर्ट में तलब किया गया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को तय की गई है। माना जा रहा है कि यह केस भ्रामक विज्ञापन, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े मामलों में भविष्य के लिए एक अहम मिसाल बन सकता है।