Modinagar Road, Hapur - 245101 (UP)

मतदाता सूची...

मतदाता सूची पुनरीक्षण में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप, संजय सिंह ने चुनाव आयोग और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
Shiva Azad / 14-01-2026

मतदाता सूची पुनरीक्षण में बड़े फर्जीवाड़े का आरोप, संजय सिंह ने चुनाव आयोग और सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है, जिससे लोकतंत्र को गहरा नुकसान पहुंच सकता है।


जानबूझकर हटाए गए करोड़ों मतदाताओं के नाम
संजय सिंह ने कहा कि ग्राम पंचायत, जिला पंचायत और बीडीसी चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता पुनरीक्षण कराया गया, जबकि नगर निगम क्षेत्रों में भी भिन्न प्रक्रिया अपनाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस असमान और संदिग्ध प्रक्रिया के जरिए जानबूझकर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।


उन्होंने बताया कि दिसंबर 2025 में चुनाव आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश में 17 करोड़ मतदाता होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर केवल 12 करोड़ 55 लाख मतदाता ही बताए गए। संजय सिंह का आरोप है कि करीब साढ़े चार करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से गायब कर दिए गए हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत गंभीर विषय है।


हर बूथ पर 200 वोट बढ़ाने का दावा
आप सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि प्रत्येक बूथ पर करीब 200 वोट बढ़ाने की तैयारी की जा रही है और अन्य राज्यों से मतदाताओं के नाम जोड़ने की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष से जुड़े मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे, जबकि भाजपा समर्थक मतदाताओं की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने भाजपा विधायक नीरज बोरा के एक बयान का हवाला देते हुए कहा कि इससे उनके आरोपों को बल मिलता है।


सुप्रीम कोर्ट से निष्पक्ष जांच की मांग
संजय सिंह ने बताया कि इस संबंध में मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर 2 करोड़ 17 लाख फॉर्म-10 और 2 करोड़ 10 लाख शिफ्टेड मतदाताओं की विस्तृत जानकारी मांगी जाएगी। उन्होंने इस पूरे मामले को “बड़ा चुनावी घोटाला” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची के साथ इस तरह का खिलवाड़ हुआ, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचेगी और जनता का विश्वास कमजोर होगा।