नए साल का सबसे बड़ा तोहफा: 24 घंटे में माफिया कब्जे से मुक्त हुआ शहीद मेजर की बेटी का घर, भावुक होकर छलके आंसू
लखनऊ। नए साल 2026 की शुरुआत लखनऊ की रहने वाली अंजना भट्ट के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं रही। वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठी अंजना को महज 24 घंटे के भीतर उनका पैतृक घर वापस मिल गया, जिस पर माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे कब्जा कर लिया था।
शहीद पिता की बेटी, टूटा हुआ परिवार
अंजना भट्ट, स्वर्गीय मेजर बिपिन चंद्र भट्ट की पुत्री हैं, जिन्होंने भारतीय सेना में देश की सेवा की थी। वर्ष 1994 में पिता के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। समय के साथ भाई और एक बहन का भी देहांत हो गया। अकेलेपन और सदमे ने अंजना को गंभीर मानसिक बीमारी सीजोफ्रेनिया का शिकार बना दिया। वर्ष 2016 से वह एक रिहैबिलिटेशन सेंटर में इलाज करा रही हैं।
कमजोरी का फायदा उठाकर हड़पा घर
अंजना की इस हालत का फायदा उठाकर चंदौली निवासी बलवंत यादव उर्फ बबलू और मनोज यादव ने फर्जी वसीयत और जाली कागजात तैयार कर इंदिरा नगर स्थित उनके मकान पर अवैध कब्जा कर लिया। अंजना ने स्थानीय स्तर पर शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।
मुख्यमंत्री से मिलते ही बदली किस्मत
न्याय की आखिरी उम्मीद लेकर अंजना 31 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलीं। मुख्यमंत्री ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल पुलिस को सख्त निर्देश दिए।
24 घंटे में कार्रवाई, माफिया सलाखों के पीछे
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद लखनऊ की गाजीपुर पुलिस हरकत में आई। 1 जनवरी 2026 तक दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया, अवैध कब्जा हटाया गया और अंजना को उनका घर विधिवत सौंप दिया गया।
खुशी से भर आईं आंखें
जब अंजना को उनके पिता की यादों से जुड़ा घर वापस मिला, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पुलिस प्रशासन का आभार जताया।