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फर्जी लूट केस का पर्दाफाश: 3 साल जेल काटने वाले पीड़ित की याचिका पर 13 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश से मचा हड़कंप
Gulzar Ali / 26-12-2025

फर्जी लूट केस का पर्दाफाश: 3 साल जेल काटने वाले पीड़ित की याचिका पर 13 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश से मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। एक कथित फर्जी लूट केस में निर्दोष व्यक्ति को तीन साल तक जेल में रखने के मामले में संभल की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश अदालत ने पीड़ित ओमवीर कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान बुधवार को दिया।


⚖️ अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

50 वर्षीय ओमवीर कुमार ने अदालत को बताया कि पुलिस ने अपनी “बड़ी कामयाबी” दिखाने के लिए उन्हें झूठे लूट मामले में फंसा दिया। इतना ही नहीं, उन्हें मीडिया के सामने अंतरराष्ट्रीय अपराधी के रूप में पेश किया गया।
ओमवीर के अधिवक्ता सुकांत कुमार के अनुसार, अदालत ने इस मामले में दो इंस्पेक्टर, चार सब-इंस्पेक्टर और सात अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।


🚨 लूट के समय पहले से जेल में था आरोपी

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 25 अप्रैल 2022 को संभल में एक दूध विक्रेता से करीब एक लाख रुपये की लूट हुई थी। पुलिस ने इस मामले में 7 जुलाई 2022 को ओमवीर कुमार और ऋषिपाल को गिरफ्तार किया।
लेकिन अदालत के सामने जेल रिकॉर्ड पेश किए गए, जिनसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया—
रिकॉर्ड के अनुसार, ओमवीर कुमार 11 अप्रैल से 12 मई 2022 तक बदायूं जेल में बंद थे, यानी लूट की घटना के समय वह पहले से जेल में थे। अदालत ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति जेल में बंद था, वह लूट की वारदात कैसे कर सकता है?


🧾 पुरानी रंजिश और साजिश का आरोप

ओमवीर ने आरोप लगाया कि गांव के प्रधान से उनकी पुरानी रंजिश थी और कुछ पुलिसकर्मी प्रधान के संपर्क में थे। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों में नतीजे दिखाने के दबाव में पुलिस ने उन्हें और सह-आरोपी ऋषिपाल को जबरन फंसा दिया।
इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उन्हें खतरनाक अपराधी बताया गया और 19 टूटी मोटरसाइकिलों को बरामदगी के रूप में दिखाया गया।

💔 तीन साल जेल, तबाह हो गया परिवार

जहां सह-आरोपी ऋषिपाल को पहले ही जमानत मिल गई थी, वहीं ओमवीर को करीब तीन साल तक जेल में रहना पड़ा
ओमवीर ने दर्द बयां करते हुए कहा—
“मेरे पास पहले कई बीघा जमीन थी, आज एक बीघा भी नहीं बची। किराए के कमरे में रह रहा हूं। बच्चों की पढ़ाई का सपना टूट गया, अब वे शादी-ब्याह में मजदूरी कर रहे हैं।”


🚔 पुलिस की भूमिका पर बड़ा सवाल

अदालत के इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। यह मामला शक्ति के दुरुपयोग, झूठे मुकदमों और निर्दोष व्यक्ति की जिंदगी बर्बाद करने की गंभीर मिसाल बन गया है।
अब अदालत के आदेश के तहत 13 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।